सभी देवताओं के गायत्री मंत्र - देवताओं के गायत्री मंत्र की साधना

        देवताओं के गायत्री मंत्र की साधना

देवताओं के गायत्री मंत्र की साधना



सभी देवताओं के गायत्री मंत्र क्या है?

गायत्री मंत्र हिंदू धर्म का एक बहुत ही प्रसिद्ध मंत्र है। इस मंत्र का उच्चारण करने से मनुष्य का मन शांत होता है और उसे आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है। सभी देवताओं के गायत्री मंत्र भी इसी प्रकार का मंत्र है

जो सभी देवताओं के आराध्य रूप को सम्मिलित करता है। यह मंत्र सूर्य देवता की स्तुति के लिए जाना जाता है और इसका उच्चारण सभी देवताओं की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का उपाय माना जाता है।


सर्वप्रथम हाथ जोडकर प्रणाम करे
ॐ गुं गुरुभ्यो नम:
ॐ श्री गणेशाय नम:
ॐ गायत्र्यै नम:
अब दाहिने हाथ मे जल लेकर 4 बार आचमन करे

ओउम् भूर्भुव: स्व: । तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो न: प्रचोदयात् ॥

गुरु गायत्री मंत्र :-

ॐ गुरुदेवाय विद्महे परम गुरवे धिमहि तन्नो गुरु: प्रचोदयात्



गणेश गायत्री मंत्र :-

ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ।।

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ।।


ब्रह्मा गायत्री मंत्र :-

ॐ वेदात्मने विद्महे, हिरण्यगर्भाय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ।।

ॐ चतुर्मुखाय विद्महे, कमण्डलु धाराय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ।।

ॐ परमेश्वर्याय विद्महे, परतत्वाय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ।।


विष्णु गायत्री मंत्र :-

ॐ नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो विष्णु प्रचोदयात् ।।


शिव गायत्री मंत्र :-

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्र: प्रचोदयात् ।।

ॐ पंचवक्त्राय विद्महे, सहस्राक्षाय महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्र प्रचोदयात् ।।


दक्षिणामूर्ति गायत्री मंत्र :-

ॐ दक्षिणामूर्तये विद्महे, ध्यानस्थाय धीमहि, तन्नो धीश: प्रचोदयात् ।।


हयग्रीव गायत्री मंत्र :-

ॐ वागीश्वराय विद्महे, हयग्रीवाय धीमहि, तन्नो हंस: प्रचोदयात् ।।


दुर्गा गायत्री मंत्र :-

ॐ कात्यायन्यै विद्महे, कन्याकुमार्ये च धीमहि, तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ।।

ॐ महाशूलिन्यै विद्महे, महादुर्गायै धीमहि, तन्नो भगवती प्रचोदयात् ।।

ॐ गिरिजाय च विद्महे, शिवप्रियाय च धीमहि, तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ।।


सरस्वती गायत्री मंत्र :-

ॐ वाग्देव्यै च विद्महे, कामराजाय धीमहि, तन्नो देवी प्रचोदयात् ।

ॐ देव्यै ब्रम्हाण्यै विद्‌महे महाशक्तयै च धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात्‌ ।


लक्ष्मी गायत्री मंत्र :-

ॐ महादेव्यै च विद्महे, विष्णुपत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ।।


शक्ति (गौरी) गायत्री मंत्र :-

ॐ सुभगायै – विद्‌महे काममालिन्यै धीमहि । तन्नो गौरी प्रचोदया‍त्‌ ।

ॐ सर्वसंमोहिन्यै विद्महे, विश्वजनन्यै धीमहि, तन्नो शक्ति प्रचोदयात् ।।


अन्नपूर्णा गायत्री मंत्र :-

ॐ भगवत्यै च विद्महे, महेश्वर्यै च धीमहि, तन्नोन्नपूर्णा प्रचोदयात् ।।


काली गायत्री मंत्र :-

ॐ कालिकायै च विद्महे, श्मशानवासिन्यै धीमहि, तन्नो घोरा प्रचोदयात् ।।


नन्दिकेश्वर गायत्री मंत्र :-

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, नन्दिकेश्वराय धीमहि, तन्नो वृषभ: प्रचोदयात् ।।


गरुड़ गायत्री मंत्र :-

ॐ वैनतेयाय विद्महे, सुवर्णपक्षाय धीमहि, तन्नो गरुड: प्रचोदयात् ।।


हनुमान गायत्री मंत्र :-

ॐ आंजनेयाय विद्महे, वायुपुत्राय धीमहि, तन्नो हनुमान् प्रचोदयात् ।।

ॐ वायुपुत्राय विद्महे, रामदूताय धीमहि, तन्नो हनुमत् प्रचोदयात् ।।


शण्मुख गायत्री मंत्र :-

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महासेनाय धीमहि, तन्नो शण्मुख प्रचोदयात् ।।


अयप्पन गायत्री मंत्र :-

ॐ भूतादिपाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो शास्ता प्रचोदयात् ।।


धनवन्तरी गायत्री मंत्र :-

ॐ अमुद हस्ताय विद्महे, आरोग्य अनुग्रहाय धीमहि, तन्नो धनवन्त्री प्रचोदयात् ।।


कृष्ण गायत्री मंत्र :-

ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो कृष्ण प्रचोदयात् ।।


राधा गायत्री मंत्र :-

ॐ वृषभानुजाय विद्महे, कृष्णप्रियाय धीमहि, तन्नो राधा प्रचोदयात् ।।


राम गायत्री मंत्र :-

ॐ दशरथाय विद्महे, सीता वल्लभाय धीमहि, तन्नो रामा: प्रचोदयात् ।।


सीता गायत्री मंत्र :-

ॐ जनकनन्दिंयै विद्महे, भूमिजयै धीमहि, तन्नो सीता प्रचोदयात् ।।


तुलसी गायत्री मंत्र :-

ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।।


शंख गायत्री मंत्र :-

ॐ पांचजन्याय विद्‌महे पावमानाय धीमहि । तन्नो शंख: प्रचोदयात्‌ ।।


सूर्य गायत्री मंत्र :-

ॐ भास्काराय विद्‌महे महत्‌द्युतिकराय धीमहि । तन्नो सूर्य: प्रचोदयात्‌ ।


लक्ष्मण गायत्री मंत्र :-

ॐ दाशरथाय विद्‌महे उर्मिलेशाय धीमहि । तन्नो लक्ष्मण: प्रचोदयात्‌ ।


गोपाल गायत्री मंत्र :-

ॐ गोपीप्रियया विद्‌महे वासुदेवाय – धीमहि । तन्नो गोप: प्रचोदयात्‌ ।


दत्त गायत्री मंत्र :-

ॐ दिगम्बराय विद्‌महे अवधूताय धीमहि । तन्नो दत्त: प्रचोदयात्‌ ।


गुरु गायत्री मंत्र :-

ॐ जलबिंबाय विद्‌महे नीलपुरुषाय धीमहि । तन्नोऽम्बु प्रचोदयात्‌ ।


अग्नि गायत्री मंत्र :-

ॐ महाज्वालाय विद्‌महे अग्निमयाय धीमहि । तन्नोऽग्नि: प्रचोदयात्‌ ।


चन्द्र गायत्री मंत्र :-

ॐ क्षीरपुत्राय विद्‌महे अमृतत्वाय धीमहि । तन्नो्श्चन्द्र: प्रचोदयात्‌ ।


गंगा गायत्री मंत्र :-

ॐ भागीरथ्यैच विद्‌महे विष्णुपद्यै च – धीमहि । तन्नो गंगा प्रचोदयात्‌ ।


हंस गायत्री मंत्र :-

ॐ परमहंसाय विद्‌महे धीमहि महत्तत्वाय धीमहि । तन्नो हंस प्रचोदयात्‌ ।


गंगा गायत्री मंत्र :-


ॐ त्रिपथगामिनी विद्महे रुद्रपत्न्यै च धीमहि तन्नो गंगा प्रचोदयात्


यमुना गायत्री मंत्र :-

ॐ यमुनादेव्यै च विद्महे तीर्थवासिनी च धीमहि तन्नो यमुना प्रचोदयात्


मार्कंडेय ऋषि गायत्री मंत्र :-


ॐ मृकुण्डुपुत्राय विद्महे योगज्ञानाय च धीमहि तन्नो मार्कंडेय: प्रचोदयात्


महर्षि वेद व्यास  गायत्री मंत्र :-
ॐ पाराशरगोत्राय विद्महे नानापुराणाय धीमहि तन्नो व्यास: प्रचोदयात्

महर्षि वाल्मीकि गायत्री मंत्र :-
ॐ आदिऋष्यै विद्महे रामायणाय धीमहि तन्नो वाल्मिकि: प्रचोदयात्
महर्षि वशिष्ठ  मंत्र :-
ॐ ब्रह्ममानसपुत्राय विद्महे पुराणेतिहासकाराय धीमहि तन्नो वसिष्ठ: प्रचोदयात्
महर्षि पराशर गायत्री मंत्र :-

ॐ शक्तिपुत्राय विद्महे पापानिती निवारणाय धीमहि तन्नो पराशर: प्रचोदयात्


महर्षि विश्वामित्र गायत्री मंत्र :-
ॐ गाधिपुत्राय विद्महे गायत्रीमंत्रप्रवर्तकाय च धीमहि तन्नो विश्वामित्र: प्रचोदयात्

महर्षि अत्री गायत्री मंत्र :-
ॐ अक्षुणोत्पत्ताय विद्महे ब्रह्मपुत्राय धीमहि तन्नो अत्रि: प्रचोदयात्

पतिवृता माँ अनसुइया गायत्री मंत्र :-
ॐ कर्दमसुतायै विद्महे अत्रिभार्यायै धीमहि तन्नो अनसुया प्रचोदयात्

सप्तऋषि गौतम गायत्री मंत्र :-
ॐ सप्तर्षाय विद्महे मानसीसृष्टाय धीमहि तन्नो गौतम: प्रचोदयात्


 नरसिंह गायत्री मंत्र :-
ॐ उग्रनृसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि नृसिंह: प्रचोदयात् .


परशुराम  गायत्री मंत्र :-
ॐ जामदग्नाय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम: प्रचोदयात्
ॐ वज्रनखाय विद्‌महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि । तन्नो नृसिंह: प्रचोदयात्‌ ।


अन्य देवी देवताओं के गायत्री मंत्र :-

ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात्
ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृततत्त्वाय धीमहि तन्नो चंद्र: प्रचोदयात्
ॐ अंगारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौम: प्रचोदयात्
ॐ सौम्यरुपाय विद्महे बाणेशाय धीमहि तन्नो बुध: प्रचोदयात्
ॐ आंगिरसाय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नो जीव: प्रचोदयात्
ॐ शुक्राचार्याय विद्महे गौरवर्णाय धीमहि तन्नो शुक्र: प्रचोदयात्
ॐ कृष्णांगाय विद्महे रविपुत्राय धीमहि तन्नो सौरि: प्रचोदयात्
ॐ कृष्णवर्णाय विद्महे रौद्ररुपाय धीमहि तन्न: शनैश्चर: प्रचोदयात्
ॐ शिरोरुपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्न: राहु: प्रचोदयात्
ॐ पद्मपुत्राय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नो केतु: प्रचोदयात्
ॐ पृथ्वीदेव्यै विद्महे सहस्रमूर्त्यै च धीमहि तन्नो पृथ्वी प्रचोदयात्
ॐ महाज्वालाय विद्महे अग्निदेवाय धीमहि तन्नो अग्नि: प्रचोदयात्
ॐ जलबिंबाय विद्महे नीलपुरुषाय धीमहि तन्नो अंबु प्रचोदयात्
ॐ विश्वपुरुषाय विद्महे शिवापत्ये च धीमहि तन्नो पवन: प्रचोदयात्
ॐ सर्वव्यापकाय विद्महे गगनाय च धीमहि तन्नो आकाश: प्रचोदयात्
ॐ सहस्त्रनेत्राय विद्महे वज्रहस्ताय धीमहि तन्न: इंद्र: प्रचोदयात्
ॐ वैश्वानराय विद्महे सप्तजिव्हाय धीमहि तन्नो अग्नि: प्रचोदयात्
ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे महाकालाय धीमहि तन्नो यम: प्रचोदयात्
ॐ ज्वालामुखाय विद्महे उष्ट्रवाहनाय धीमहि निऋति: प्रचोदयात्
ॐ पश्चिमेशाय विद्महे पाशहस्ताय धीमहि तन्नो वरुण: प्रचोदयात्
ॐ ध्वजहस्ताय विद्महे प्राणाधिपाय धीमहि तन्नो वायु: प्रचोदयात्
ॐ यक्षराजाय विद्महे पुलस्त्य पुत्राय धीमहि तन्नो कुबेर: प्रचोदयात्
ॐ अर्धदेवाय विद्महे व्यंतरदेवत्रे च धीमहि तन्नो यक्ष: प्रचोदयात्
ॐ गीतवीणायै विद्महे कामरुपिण्यै धीमहि तन्नो गंधर्व: प्रचोदयात्
ॐ कामदेवप्रियायै विद्महे सौंदर्यमूर्तये धीमहि तन्नो अप्सरा प्रचोदयात्
ॐ सहस्त्रफणाय विद्महे वासुकिराजाय धीमहि तन्नो नाग: प्रचोदयात्

पितृ गायत्री मंत्र
ॐ पितृवंशाय विद्महे प्रपितामहाय धीमहि तन्नो पितर: प्रचोदयात्
ॐ नागपृष्ठाय विद्महे शूलहस्ताय धीमहि तन्नो वास्तु प्रचोदयात्






यह मंत्र सुख, समृद्धि, स्वस्थता और शांति का संदेश देता है। सभी देवताओं के गायत्री मंत्र को उच्चारण करने से मन शांत होता है और व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

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